अगर आप घर पर डेयरी शुरू करना चाहते हैं या अपनी मौजूदा पशुपालन गतिविधि को बढ़ाना चाहते हैं, तो एसबीआई की पशुपालन लोन योजना इस समय किसानों के लिए एक बड़ा सहारा बन रही है। बढ़ती दूध की मांग, गांवों में डेयरी कार्यों की तेजी और सरकार द्वारा पशुपालन को बढ़ावा देने की नीतियों के चलते बहुत से लोग अब इस क्षेत्र में निवेश करना चाह रहे हैं। इसी जरूरत को देखकर भारतीय स्टेट बैंक ने छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए यह आसान व कम ब्याज वाले लोन की सुविधा उपलब्ध कराई है, ताकि ग्रामीण परिवार अपनी आय के नए साधन मज़बूत कर सकें।
इस योजना में मिल रहे लोन की राशि और उसकी जरूरत
एसबीआई पशुपालन लोन योजना के तहत गाय खरीदने के लिए लगभग सत्तर हजार रुपये तक और भैंस खरीदने के लिए लगभग अस्सी हजार रुपये तक का लोन दिया जा रहा है, जो पशु की कीमत और उसके बाजार मूल्य के हिसाब से तय होता है। इस राशि से किसान एक या दो पशुओं से भी अपनी शुरुआत कर सकते हैं और आगे दूध की बिक्री, गोबर से अतिरिक्त आय तथा प्राकृतिक खेती से जुड़े लाभों को जोड़कर अपनी आमदनी में तेजी ला सकते हैं। कई ग्रामीण परिवार कम पूंजी में यह काम आसानी से संभाल लेते हैं, इसलिए बैंक भी ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाने में रुचि दिखा रहा है।
लोन लेने की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज
लोन की प्रक्रिया को सरल रखा गया है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बिना किसी परेशानी के आवेदन कर सकें। आवेदन करने के लिए पहचान पत्र, पता प्रमाण, बैंक पासबुक, पशुपालन से जुड़े किसी छोटे व्यावसायिक प्लान का विवरण और आधार कार्ड की जरूरत पड़ती है। एसबीआई की शाखा में आवेदन जमा करने के बाद बैंक अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया जाता है, जिसमें यह देखा जाता है कि आवेदक के पास पशुओं को रखने के लिए उचित जगह है या नहीं। इसके बाद लोन की राशि स्वीकृत होकर सीधे खाते में भेज दी जाती है। पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, जिससे आवेदक जल्दी से जल्दी अपना काम शुरू कर सके।
ब्याज दर और चुकाने की सुविधा
इस योजना में ब्याज दर काफी कम रखी गई है ताकि किसानों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। आमतौर पर पशुपालन से होने वाली आय नियमित रहती है, क्योंकि दूध की बिक्री रोजाना होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बैंक किस्तों को मासिक या द्विमासिक आधार पर बांट देता है, ताकि किसान आसानी से भुगतान कर सकें। अगर कोई किसान अधिक पशु खरीदना चाहता है, तो वह बाद में भी अपनी सीमा बढ़ाने के लिए आवेदन कर सकता है, लेकिन इसके लिए बैंक पशुपालन की स्थिति और पिछले किस्तों के भुगतान की जांच करता है।
योजना के ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
पशुपालन भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और आज भी लाखों परिवार इसकी बदौलत हर महीने स्थिर आय प्राप्त कर रहे हैं। एसबीआई जैसी बड़ी बैंकें जब इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाती हैं, तो इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर बनते हैं। डेयरी का काम शुरू होने से दूध विक्रेताओं, चारे के दुकानदारों, दवाओं और टीकाकरण से जुड़े कारोबारों में भी तेजी आती है। यही कारण है कि यह योजना केवल पशुपालकों के लिए ही नहीं बल्कि गांव के अन्य छोटे कारोबारियों के लिए भी फायदे का सौदा साबित हो रही है। कई राज्यों में ऐसे परिवार देखने को मिल रहे हैं जिन्होंने दो पशुओं से शुरूआत की और आज वे छोटे डेयरी उद्यमी बन चुके हैं।
लाभ लेने के लिए सही समय और सावधानियां
अगर आप भी इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो यह जरूरी है कि आप अपने इलाके में पशुओं की उपलब्धता, चारे की लागत और दूध के स्थानीय बाजार मूल्य की जानकारी पहले से जुटा लें। पशु खरीदते समय उसके स्वास्थ्य, दूध उत्पादन क्षमता, उम्र और नस्ल की जांच अवश्य करें, ताकि आगे चलकर किसी भी प्रकार की परेशानी न आए। बैंक द्वारा दी गई राशि का उपयोग केवल पशु खरीद और उससे जुड़ी जरूरतों पर करें, क्योंकि गलत उपयोग से व्यवसाय कमजोर हो सकता है और किस्त चुकाने में दिक्कत आ सकती है। समय-समय पर पशुओं का टीकाकरण, बेहतर चारा और साफ-सफाई भी आय को स्थिर रखने में काफी मदद करते हैं।
